विधानसभा सत्र के बीच गैरसैंण को जिला बनाने की मांग तेज, केंद्रीय विद्यालय खोलने की भी डिमांड

गैरसैंण क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने विधानसभा के दो दिवसीय सत्र को ‘सियासी पिकनिक’ और बजट ठिकाने लगाने का जरिया कहा

गैरसैंण: सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में आज से आयोजित होने वाले दो दिवसीय विधानसभा सत्र से ठीक पहले क्षेत्र में सियासी पारा चढ़ गया है. एक ओर जहां क्षेत्रीय जनता, जनप्रतिनिधियों व उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारियों ने सरकार से गैरसैंण को जिला घोषित करने की मांग की है, तो वहीं दूसरी ओर मात्र दो दिवसीय इस सत्र को लेकर सरकार को आड़े हाथों भी लिया है. क्षेत्रवासियों का कहना है कि सत्र के नाम पर पहाड़ की भावनाओं के साथ लगातार छलावा किया जा रहा है.

गैरसैंण को जिला बनाने की मांग तेज: क्षेत्रवासियों व आंदोलनकारियों का कहना है कि तमाम राजनीतिक दलों ने हमेशा गैरसैंण का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ अपने चुनावी फायदों के लिए किया है. जनता अब इस राजनीतिक दांवपेंच को अच्छी तरह समझ चुकी है. क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में गैरसैंण और पहाड़ के विकास को लेकर गंभीर है, तो उसे सबसे पहले गैरसैंण को राज्य की ‘स्थायी राजधानी’ घोषित करना चाहिए. कहा कि, प्रतीकात्मक और कुछ दिनों की राजधानी बनाकर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के मूल संकल्पों का अपमान किया जा रहा है.

दो दिवसीय सत्र को जनता ने बताया ‘सियासी पिकनिक’: विधानसभा भवन भराड़ीसैण के नजदीकी गांव दिवालीखाल के स्थानीय बुजुर्ग पूरन सिंह नेगी ने, इस दो दिवसीय सत्र के आयोजन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि-

सत्र के नाम पर केवल नेताओं और नौकरशाहों द्वारा सरकारी खजाने के भारी-भरकम बजट को ठिकाने लगाने का काम किया जा रहा है. यह सत्र माननीयों और वीआईपी अफसरों के लिए एक ‘पिकनिक टूर’ से ज्यादा कुछ नहीं है. देहरादून से मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों की फौज गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ यहां आती है. मौज-मस्ती करती है और वापस लौट जाती है.
-पूरन सिंह नेगी, निवासी, दिवालीखाल-

उन्होंने कहा कि दो दिन के इस दिखावे वाले सत्र में न तो पहाड़ की मुख्य समस्याओं पर कोई ठोस नीति बनती है और न ही स्थानीय लोगों को इससे कोई लाभ मिलता है. यदि सरकार को गैरसैंण की इतनी ही चिंता है, तो इसी सत्र के दौरान सबसे पहले गैरसैंण को नया जिला घोषित किया जाए. अन्यथा सत्र के नाम पर स्थानीय लोगों को ठगना और छलना बंद किया जाए.

गैरसैंण में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग: वहीं, स्थानीय युवा मिंटू भंडारी ने कहा कि-

एक तरफ जहां सत्र के लिए भराड़ीसैंण विधानसभा और आसपास के वीआईपी रूटों को चमकाया जा रहा है, वहीं स्थानीय जनता अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सालों से तरस रही है. केवल दो दिन का वीआईपी मूवमेंट देने के बजाय सरकार इन मुद्दों का समाधान करे, जिसमें ज्योलीकोट से कर्णप्रयाग तक राष्ट्रीय राजमार्ग का चौड़ीकरण, गैरसैंण क्षेत्र को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों और नेशनल हाईवे की हालत खस्ता है, इसका तुरंत चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाए.
-मिंटू भंडारी, स्थानीय निवासी-

स्थानीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पलायन न करना पड़े, इसके लिए गैरसैंण में तत्काल केंद्रीय विद्यालय खोला जाए. स्थानीय चिकित्सालय की स्थिति बेहद दयनीय है. अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को मीलों दूर हायर सेंटर श्रीनगर, देहरादून, रानीखेत व हल्द्वानी न भागना पड़े.

हवाई वादे नहीं, ठोस काम हो: गैरसैंण की जनता का आक्रोश यह साफ बयां करता है कि अब वे नेताओं के हवाई वादों और इस दो दिवसीय ‘सत्र रूपी पिकनिक’ के झांसे में आने वाले नहीं हैं. लोगों का कहना है कि सरकार को अब यह तय करना होगा कि वह गैरसैंण को उसका वास्तविक अधिकार देती है या फिर इसी तरह दावे व वादे करती रहेगी.

गैरसैंण में आयोजित यह सत्र सरकार के लिए भले ही एक राजनीतिक औपचारिकता हो, लेकिन स्थानीय जनता के लिए यह उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की उम्मीद का सत्र है. जनता का सीधा संदेश है कि सरकार को केवल सत्र के आयोजन तक सीमित न रहकर, गैरसैंण को पूर्ण जिला बनाने और यहां के स्थायी विकास के लिए बजट खर्च करना चाहिए.