
उत्तराखंड के अशासकीय संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के संगठन “संस्कृत विद्यालय/महाविद्यालय प्रबन्धकीय शिक्षक समिति” की एक महत्वपूर्ण बैठक ऋषिकेश में आयोजित की गई। बैठक में उत्तराखंड के संस्कृत विद्यालयों में विगत कई वर्षों से शिक्षण सेवाएँ दे रहे 84 शिक्षकों को मानदेय की श्रेणी में सम्मिलित किए जाने पर संस्कृत शिक्षा मंत्री माननीय डॉ. धन सिंह रावत जी का आभार व्यक्त किया गया।
समिति के अध्यक्ष डॉ. भगवती प्रसाद बिजल्वाण ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उक्त 84 शिक्षक पूर्व में मानदेय की श्रेणी में सम्मिलित होने से वंचित रह गए थे। शासन द्वारा मानदेय में सम्मिलित किए जाने संबंधी शासनादेश जारी कर इन शिक्षकों के साथ न्याय किया गया है, जिसके लिए सरकार एवं संस्कृत शिक्षा विभाग धन्यवाद के पात्र हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा कई वर्षों से लंबित संस्कृत महाविद्यालयों के वर्गीकरण से संबंधित शासनादेश जारी किया जाना संस्कृत जगत के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है। ये दोनों शासनादेश उत्तराखंड में संस्कृत के सम्मान एवं संरक्षण के प्रति माननीय शिक्षा मंत्री की संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
बैठक में मानदेय में सम्मिलित किए गए सभी शिक्षकों के चेहरों पर खुशी लाने के लिए उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा विभाग का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर भगवती प्रसाद बिजल्वाण, रवेन्द्र कुमार, डॉ. रामभूषण बिजल्वाण (प्राचार्य, लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय, देहरादून), अनूप सिंह रावत, चक्रपाणि मैठाणी, डॉ. सूर्यप्रकाश रतूड़ी, हंसराज भट्ट, डॉ. कमलेश ध्यानी, रामप्रसाद सेमवाल, डॉ. जीवन आर्य, डॉ. अजीत नवानी, हरीश चंद्र पांडेय, डॉ. रूपेश जोशी, मंजू बेलवाल, डॉ. अंजना उनियाल, विपिन उनियाल, पूजा शर्मा, डॉ. हर्षानंद उनियाल, मनोज पैन्यूली, रामेश्वरी देवी, सोमेश, अरुण थपलियाल सहित अनेक संस्कृत शिक्षक उपस्थित रहे।