
श्री जगद्देव सिंह संस्कृत महाविद्यालय, सप्तऋषि आश्रम, हरिद्वार के प्रांगण में आज दिनांक 24 दिसम्बर 2025 को माँ भगवती भागीरथी के पावन पश्चिमी तट पर स्थित महाविद्यालय परिसर में “सप्तऋषिषष्ठपुष्पम्” पत्रिका का भव्य एवं गरिमामय विमोचन सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ उपस्थित अतिथि महानुभावों द्वारा दीपप्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात महाविद्यालय के छात्रों द्वारा स्वागत-गीत प्रस्तुत किया गया। इसके उपरान्त श्री जगद्देव सिंह संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य, पूज्य आचार्य बुद्धिबल्लभशास्त्री जी की पावन स्मृति में प्रकाशित पत्रिका “सप्तऋषिषष्ठपुष्पम्” का विधिवत विमोचन सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी द्वारा आयोजित खण्डस्तरीय एवं जनपदस्तरीय प्रतियोगिताओं—नाटक (कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग), समूहगान (कनिष्ठ वर्ग), आशुभाषण (कनिष्ठ वर्ग) तथा वाद-विवाद (वरिष्ठ वर्ग) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मंचासीन अतिथियों द्वारा स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
उद्बोधन क्रम में सर्वप्रथम राष्ट्रपति पुरस्कार से अलंकृत, श्री रामानुज संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ० ओमप्रकाश भट्ट जी ने पूज्य आचार्य बुद्धिबल्लभशास्त्री जी की स्मृति में स्वलिखित प्रशस्ति-पत्र का वाचन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य श्री कान्ता प्रसाद बडोला जी ने आचार्य बुद्धिबल्लभशास्त्री जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को अनुकरणीय बताया। उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के पूर्व उपाध्यक्ष प्रो० प्रेमचन्द्र शास्त्री जी ने उनके साथ व्यतीत संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि वे शिक्षण-कौशलों में पूर्णतः निपुण—उत्तम पाठक, प्रभावशाली लेखक, ओजस्वी वक्ता एवं कुशल श्रोता थे।
सहायक निदेशक डॉ० वाजश्रवा आर्य जी ने आचार्य श्री से जुड़े संस्मरणों का उल्लेख किया। निदेशक, संस्कृत शिक्षा उत्तराखण्ड, देहरादून श्रीमती कंचन देवराड़ी जी ने उन्हें “संस्कृत-पुरुष” की संज्ञा देते हुए उनके कार्यों को ऋषि-सदृश बताया। कुलपति, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रो० दिनेश चन्द्र शास्त्री जी ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पूज्य गुरुवर के आदर्श महामना पं० मदनमोहन मालवीय जी से मिलते हैं, जिनसे हमें राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा लेनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा (पंजाब) के लोकप्रिय प्रधान डॉ० देशबन्धु शर्मा जी ने आचार्य बुद्धिबल्लभशास्त्री जी को अपना अभिभावक बताते हुए कहा कि आज समाज को ऐसे ही सशक्त एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शकों की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ० राजेन्द्र कुमार गौनियाल जी ने सभी आगन्तुक अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा (पंजाब) के कार्यवाहक प्रधान श्री इन्द्रमोहन गोस्वामी जी, उपाध्यक्ष श्री उपेन्द्र शर्मा जी, कार्यालय मंत्री श्री सुभाष शर्मा जी, महामंत्री डॉ० गुरदीप शर्मा जी, डॉ० वेदप्रकाश शर्मा, डॉ० रूपेन्द्र दत्त शर्मा (पूर्व अपर निदेशक, एस०सी०आर०टी०, उत्तराखण्ड, देहरादून), ग्राम प्रधान हरिपुरकलां, महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण तथा अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।